शंखनाद

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् || परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||

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दोहे

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थोड़ी सी जलराशि के, आगे रेत विशाल |
मर्त्यलोक में जिंदगी, का ऐसा ही हाल || (१)
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जलते रेगिस्तान में, आशा का नहिं अंत |
असुरों के भी देश में, मिल जाते हैं संत || (२)
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कंकड़ियों का गाँव ये, बढ़ा रहा है रेत |
बहता शीतल जल कहे, अब तो जाओ चेत || (३)
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जल पनघट से सूखता, तरुओं, प्राण समेत |
वारिद भी लाचार है, नहीं बुलाए रेत || (४)
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जो मिथ्या अभिमान में, ले जल से मुँह मोड़ |
उसको दुनिया छोड़ दे, सारे नाते तोड़ || (५)
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जल के तीरे रेत ही, है दुनिया की रीत |
कर संगत संगे बजे, सुख-दुख का संगीत || (६)
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जन दे डर के रेत से, त्राहिमाम सन्देश |
ढाढस देता जल कहे, अभी बचा मैं शेष || (७)
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कुदरत ने फिर से किया, जीवों पर उपकार |
देखो तो मरुभूमि से, फूट पड़ी जलधार || (८)
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दुनिया में भी दीखते, कैसे-कैसे दृश्य |
पानी स्वागतयोग्य तो, मरुथल है अस्पृश्य || (९)
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देखत मन के नैन से, मुख से निकले बोल |
बिन दहकत मरुभूमि के, नहिं पानी का मोल || (१०)
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उर्वरता को काटते, बंजरता के नाग |
पानी को रक्षित किये, नवतरुओं के भाग || (११)



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
October 30, 2012

जो मिथ्या अभिमान में, ले जल से मुँह मोड़ | उसको दुनिया छोड़ दे, सारे नाते तोड़ || (५) …………………………………………………….. जल के तीरे रेत ही, है दुनिया की रीत | कर संगत संगे बजे, सुख-दुख का संगीत मित्रवर कुमार गौरव जी , दिल प्रसन्न हो गया ! बहुत खूब , सुन्दर दोहे

shashibhushan1959 के द्वारा
October 28, 2012

आदरणीय गौरव जी, सादर ! क्या बात है ! मन प्रसन्न हो गया ! बहुत सुन्दर रचना ! किसी कवि की दो पंक्तियाँ याद आ रही है…… “कविता में अनिवार्य है, कथ्य-शिल्प, लय-छंद ! जैसे पुष्प गुलाब में, रूप – रंग, रस – गंध !!”" स्वच्छ जल की प्रवाहमयी धारा के सामान छल-छल करती पंक्तियाँ ! सहजगम्य अर्थ ! बहुत सुन्दर ! सभी दोहे एक दूसरे से बढ़कर ! हार्दिक बधाई !

Santlal Karun के द्वारा
October 27, 2012

अत्यंत सधे हुए दोहे, अधिकांश खड़ी बोली में, सारगर्भित और व्यापक अर्थ के साथ; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! “कंकड़ियों का गाँव ये, बढ़ा रहा है रेत | बहता शीतल जल कहे, अब तो जाओ चेत ||” ……………………………………………………..

akraktale के द्वारा
October 27, 2012

गौरव जी             सादर, पानी के महत्त्व पर लिखे सुन्दर दोहे बधाई स्वीकारें.


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