शंखनाद

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् || परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् | धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ||

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हनुमान आराधना (रोला छंद पर आधारित)

Posted On: 23 Oct, 2012 में

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hanuman-blessing

जय जय श्री हनुमान, शरण हम तेरी आये |
हे अंजनि के लाल, कुसुम श्रद्धा के लाये ||
जग में सारे दीन, एक तुम ही हो दाता |
तेरा सच्चा भक्त, सदा सुख को ही पाता || (१)

हे रघुवर के दूत, जगत है तेरी माया |
कण-कण में हे नाथ, रूप है तेरा पाया ||
शंकर के अवतार, देव तुम हो बजरंगी |
दुष्टों के हो काल, दीन-हीनों के संगी || (२)

किसका ऐसा तेज, फूँक दे क्षण में लंका |
कर दानव संहार, बजाये जग में डंका ||
हे हनुमत, श्रीराम, सदा हैं उर में तेरे |
तेरा मुख बस राम, नाम की माला फेरे || (३)

हे मेरे बजरंग, जपा जब नाम तिहारा |
कलि का भारी ताप, लगा है शीतल धारा ||
मैं बालक मतिमूढ़, न जानूँ पूजा तेरी |
इतनी विनती नाथ, क्षमा हों भूलें मेरी || (४)



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shashibhushan1959 के द्वारा
October 27, 2012

मान्यवर गौरव जी, सादर ! बहुत सुन्दर, त्रुटिहीन ! प्रवाहमय ! मन प्रसन्न हो गया ! ईश्वर आपका उन्नति मार्ग प्रशस्त करें ! हार्दिक शुभकामनाएं !

Santosh Kumar के द्वारा
October 26, 2012

श्री गौरव जी ,..सादर अभिवादन बहुत सरल अति सुन्दर प्रार्थना ,.. हे मेरे बजरंग, जपा जब नाम तिहारा | कलि का भारी ताप, लगा है शीतल धारा || मैं बालक मतिमूढ़, न जानूँ पूजा तेरी | इतनी विनती नाथ, क्षमा हों भूलें मेरी || ……..क्षमा हों भूलें मेरी ,..सादर !

ANAND PRAVIN के द्वारा
October 26, 2012

मित्र गौरव जी, नमस्कार क्या कहूँ आपने तो भक्ति में लीन कर दिया………….दोहे और रोले लिखने की इक्षा तो मेरी भी रहती है किन्तु अभी तक मुझे मात्राओं को सही से गिनना नहीं आ सका है इस कारण नहीं लिख पाटा हूँ……….कोई मार्ग सुझाएँ……..ओबिओ पर जाने को छोड़…….हा हा हा

    October 26, 2012

    नमस्कार मित्र आनंद जी आपका बहुत-बहुत धन्यवाद…… आप तो स्वयं एक अच्छे कवि हैं…..मैंने भी आपकी कवितायें पढ़ी हैं…..आपकी शैली मुझे भी बहुत पसंद आती है…..मैं आपको किसी भी ऐसे मंच पर जाने के लिए कदापि नहीं कहूँगा जहाँ जाने की आज्ञा आपका स्वाभिमान आपको नहीं देता हो…..एक अच्छे मित्र का कर्त्तव्य ही यही है की वो अपने मित्र की भावनाओं का सम्मान करे…..

akraktale के द्वारा
October 24, 2012

जय जय श्री हनुमान, शरण हम तेरी आये | हे अंजनि के लाल, कुसुम श्रद्धा के लाये || जग में सारे दीन, एक तुम ही हो दाता | तेरा सच्चा भक्त, सदा सुख को ही पाता || रोला छंद आधारित सुन्दर भक्ति रचना के लिए हार्दिक बधाई एवं विजयादशमी कि हार्दिक शुभकामनाएं.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 23, 2012

जय हो, शानदार रचना. स्नेही, शुभाशीष

Santlal Karun के द्वारा
October 23, 2012

आदरणीय अजितेंदु जी, बजरंगबली की आराधना के चारों छंद पूर्णत: व्यवस्थित तथा निष्कलंक हैं; हार्दिक साधुवाद, सद्भावनाएँ एवं श्री हनुमान की आराधना के प्रति शुभ कामनाएँ !


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